जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड़
उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर आरक्षण व्यवस्था पर खड़े हुए सवालों की गूंज हाईकोर्ट की चौखट तक बहस में अटकी है। गुरुवार को भी इस गंभीर मुद्दे पर उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई जारी रही। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने सरकार से आरक्षण रोस्टर, नियमावली और गजट प्रकाशन की वैधता पर विस्तृत और तथ्यों पर आधारित जवाब तलब किया है।

सरकार की ओर से सुनवाई में पंचायत चुनावों में आरक्षण का रोस्टर अदालत में पेश किया गया, लेकिन अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा कि कितनी सीटों परआ आरक्षण बदला गया और कितनी सीटों पर पुराना आरक्षण दोहराया गया है? साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या वर्तमान गजट प्रकाशन “साधारण खंड अधिनियम के रूल 22” और “उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम 2016 की धारा 126” के अनुरूप है? यदि नहीं, तो फिर उसकी वैधता कैसे ठहराई जा सकती है?
सरकार की ओर से महाधिवक्ता एस.एन. बाबुलकर और सीएससी चंद्रशेखर रावत ने अदालत में सभी पंचायत स्तरीय सीटों का पुराना और नया विवरण प्रस्तुत करते हुए अपनी आरक्षण प्रक्रिया को विधिसम्मत बताया। उन्होंने पंचायत चुनावों पर लगी अंतरिम रोक हटाने की भी अपील की।