Wed. Feb 4th, 2026
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जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड़

अल्मोड़ा/उत्तराखंड  अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राज्य सरकार एवं विशेष जांच टीम (SIT) की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। अपराध के मोटिव, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) जांच और घटनास्थल पर बुलडोजर चलाने जैसे मामलों में आज तक स्पष्ट और पारदर्शी जवाब न दिए जाना, जांच की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न करता है।
अंकिता द्वारा अपने अंतिम व्हाट्सएप संदेशों में “किसी वीआईपी को एक्स्ट्रा सर्विस देने के दबाव” का उल्लेख किए जाने के बावजूद, अभियुक्त पुलकित आर्य, रिज़ॉर्ट कर्मचारियों तथा कथित वीआईपी व्यक्तियों की CDR जांच को सार्वजनिक डोमेन में नहीं लाया गया। जब स्वयं SIT ने यौन शोषण को अपराध का मोटिव बताया है, तो संचार रिकॉर्ड की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच से परहेज क्यों किया जा रहा है—यह एक गंभीर प्रश्न है।
प्रकरण का दूसरा अत्यंत संवेदनशील पहलू घटनास्थल पर बुलडोजर चलाया जाना है। सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो में क्षेत्रीय विधायक स्वयं मुख्यमंत्री का धन्यवाद करती दिखाई देती हैं कि उनके अनुरोध पर वननतारा रिज़ॉर्ट पर बुलडोजर चलवाया गया। यह कार्रवाई साक्ष्य नष्ट करने की श्रेणी में आती है। जेसीबी चालक के बयान भी दर्ज हैं, जिसमें उसने विधायक के निर्देश पर बुलडोजर चलाने की बात स्वीकार की है, इसके बावजूद अब तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होना, शासन और जांच एजेंसियों की मंशा पर प्रश्न उठाता है।
सरकार द्वारा यह कहना कि “साक्ष्य लाएं, उनकी विश्वसनीयता सिद्ध करें, तब कार्रवाई होगी”—पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना बयान है। साक्ष्य जुटाना पुलिस और जांच एजेंसियों का कार्य है, न कि आम जनता का। इस प्रकार के बयान शासन की नैतिक विफलता और पुलिस तंत्र पर अविश्वास को दर्शाते हैं।
तत्कालीन पौड़ी अपर पुलिस अधीक्षक एवं SIT सदस्य रहे श्री शेखर सुयाल के हालिया सार्वजनिक वक्तव्य के बाद भी कई मूलभूत प्रश्न अनुत्तरित हैं। यदि अंकिता के कमरे को पहले ही दिन सील कर फॉरेंसिक जांच की गई थी, तो फिर बुलडोजर चलाने का निर्णय किसने और किस उद्देश्य से लिया—इस पर आज तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
जब जातिगत एंगल देने के प्रयास विफल हुए, तो सरकार और सत्तारूढ़ दल द्वारा संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखने की कोशिश की गई, जिससे राजनीतिक हस्तक्षेप का संदेह और गहरा हुआ। हाल ही में सामने आई कथित कॉल रिकॉर्डिंग्स ने इस संदेह को और मजबूत किया है।
मुख्य मांग
इन परिस्थितियों में यह स्पष्ट है कि—
सरकार नैतिक आधार पर अपना विश्वास खो चुकी है।
पूरे प्रकरण की सर्वोच्च न्यायालय के किसी माननीय न्यायाधीश की निगरानी में CBI जांच कराई जाए।
CDR जांच को सार्वजनिक किया जाए।
साक्ष्य नष्ट करने के दोषियों पर तत्काल कार्रवाई हो।
यदि ऐसा नहीं किया गया, तो उत्तराखंड के प्रत्येक गांव, शहर, ब्लॉक, देहरादून से लेकर दिल्ली तक एक व्यापक, लोकतांत्रिक जनआंदोलन किया जाएगा, जिसमें मातृशक्ति, युवा और आम नागरिक बड़ी संख्या में भाग लेंगे।
उपस्थित लोग
इस अवसर पर माननीय विधायक मदन सिंह बिष्ट, ब्लॉक प्रमुख आरती किरौला, पूर्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस रानीखेत नारायण सिंह रावत, प्रदेश कांग्रेस सदस्य राजेंद्र किरौला, ब्लॉक अध्यक्ष चौखुटिया जीवन नेगी, ग्राम प्रधान मोहन किरौला, गिरीश आर्या, किरण चौधरी, हेमा बिष्ट, बसंती देवी, राजेंद्र प्रसाद, राजेंद्र सिंह रावत, भुवन चंद्र पांडे, दिवाकर कार्की, कमला क़ैडा, जोधा सिंह बिष्ट, अर्जुन सिंह बिष्ट, पंकज कुमार, नवीन जोशी, गोपाल सिंह अधिकारी, प्रकाश सिंह अधिकारी, गणेश कठायत, दीपक बिष्ट सहित सैकड़ों मातृशक्ति, नौजवान एवं नागरिक उपस्थित रहे।