Wed. Feb 4th, 2026
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जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड़

देहरादून। उत्तराखंड को झकझोर देने वाले अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की आस लगाए पीड़ित माता-पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में मिले। बेटी को खो चुके माता-पिता ने मुख्यमंत्री के सामने अपना दर्द, आक्रोश और टूटता भरोसा साफ शब्दों में रखा।



तीन साल बाद भी न्याय अधूरा, सरकार की नीयत पर उठे सवाल


मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने “सरकार पीड़ित परिवार के साथ है” का दोहराव किया, लेकिन सवाल यह है कि अगर सरकार सच में साथ है तो अब तक दोषियों को सज़ा क्यों नहीं? क्या अंकिता को न्याय सिर्फ फाइलों और बयानों तक सीमित कर दिया गया है?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सख्ती के दावे, ज़मीनी हकीकत कुछ और
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरकार हर संभव सहयोग कर रही है और मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। लेकिन प्रदेश की जनता पूछ रही है—विचार कब खत्म होगा और कार्रवाई कब शुरू होगी?


“दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा” — यह बयान कब बनेगा हकीकत?


सीएम धामी ने फिर दोहराया कि दोषियों को किसी भी सूरत में नहीं छोड़ा जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई होगी। मगर यह बयान पहले भी कई बार दिया जा चुका है। हर बार आश्वासन मिला, न्याय नहीं।
सरकार की साख दांव पर, जनता में बढ़ता आक्रोश
अंकिता भंडारी सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि सत्ता की संवेदनशीलता और न्याय व्यवस्था की परीक्षा है। प्रदेश भर में यह सवाल गूंज रहा है—क्या रसूखदारों के लिए कानून अलग है? क्या गरीब परिवार की बेटी को न्याय मिलना इतना कठिन है?
आश्वासन नहीं, फैसले चाहिए
पीड़ित परिवार और प्रदेश की जनता अब शब्दों से नहीं, ठोस कार्रवाई और अंतिम फैसले से न्याय देखना चाहती है। अगर अब भी देर हुई, तो यह मामला सरकार के लिए केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि नैतिक पतन का प्रतीक बन जाएगा।