जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड़
VIP बचाने के आरोप, राज्य जांच पर अविश्वास — रिटायर्ड जस्टिस की निगरानी में CBI जांच नहीं तो आंदोलन पूरे उत्तराखंड में फैलाने की चेतावनी

अल्मोड़ा अंकित भंडारी हत्याकांड को लेकर अल्मोड़ा का गांधी पार्क आज सरकार के खिलाफ जनआक्रोश का अखाड़ा बन गया। सर्वदलीय और सर्व समाज की जनसभा में राज्य सरकार पर सच दबाने, जांच भटकाने और प्रभावशाली लोगों को बचाने के गंभीर आरोप लगाए गए। वक्ताओं ने दो टूक कहा—अब भरोसा नहीं, अब फैसला चाहिए।
सभा में कहा गया कि वीआईपी एंगल, कॉल रिकॉर्डिंग और अहम तथ्यों के बावजूद सरकार का सीबीआई जांच से इनकार साफ संकेत है कि न्याय को जानबूझकर रोका जा रहा है। जनता ने साफ कहा—राज्य जांच विफल हो चुकी है, इसलिए रिटायर्ड जस्टिस की निगरानी में CBI जांच ही एकमात्र रास्ता है।
“CBI से क्यों डर रही सरकार?”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर तीखा हमला करते हुए वक्ताओं ने कहा कि चुप्पी और टालमटोल इस मामले में सबसे बड़ा अपराध बन चुकी है। यदि सरकार सच में बेटी अंकित को न्याय दिलाना चाहती है, तो आज ही केंद्र को CBI जांच की संस्तुति भेजे—वरना यह माना जाएगा कि सत्ता दोषियों के साथ खड़ी है।
यह भी स्पष्ट किया गया कि यह कोई एक दिन का शोर नहीं, बल्कि लगातार सुलगता जनआंदोलन है। कल की रैली के बाद आज की भारी मौजूदगी ने संकेत दे दिया है कि जनता अब पीछे हटने वाली नहीं।
जनसभा में पी.सी. तिवारी, गिरीश गोस्वामी, विनय किरोला, विनोद चंद्र तिवारी, भूपेंद्र सिंह वल्दिया, सुजीत टम्टा, पान सिंह लटवाल, भावना जोशी, मंजू पंत, वैभव जोशी, मनोज बिष्ट, लावण्य पंत सहित बड़ी संख्या में सामाजिक, राजनीतिक और अधिवक्ता वर्ग के प्रतिनिधि मौजूद रहे। संचालन विनय किरोला ने किया।
अंत में सरकार को सीधी चेतावनी दी गई—
“CBI जांच नहीं तो संघर्ष तेज होगा”