Wed. Feb 4th, 2026
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जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड़

जनपद अल्मोड़ा में किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय उत्पादों के संवर्धन तथा वैज्ञानिक विधि से मौन पालन जैसे आजीविका आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के गठन एवं सुदृढ़ीकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला सामाजिक विकास एवं प्रबंध समिति (SVEPS) अल्मोड़ा के तत्वावधान में विकासखंड द्वाराहाट की न्याय पंचायत कुवाली स्थित पंचायत घर में आयोजित हुई।
कार्यक्रम में नाबार्ड, अल्मोड़ा के जिला विकास प्रबंधक श्री गिरीश चंद्र पंत तथा सेवानिवृत्त वरिष्ठ कीट विज्ञानी डॉ. पी. एस. कनवाल मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। संस्था के मुख्य कार्यकारी शंभू दत्त जोशी ने सभी अतिथियों, अधिकारियों, कृषकों एवं मौन पालकों का स्वागत करते हुए कार्यशाला का उद्देश्य स्पष्ट किया।
बताया गया कि अल्मोड़ा जनपद के हवालबाग, लमगड़ा, धौलादेवी, भैसियाछाना, ताकुला एवं द्वाराहाट विकासखंडों में एफपीओ के प्रभावी गठन, संचालन और दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए यह पहल महत्वपूर्ण है। बैठक का लक्ष्य मजबूत प्रबंधन ढांचे के साथ 750 सदस्य कृषकों को जोड़ते हुए एक सशक्त एफपीओ का निर्माण करना है।
बैठक में कृषि, उद्यान, पशुपालन, पर्यावरण, सहकारिता एवं उद्योग विभागों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेष जोर वैज्ञानिक तरीके से मौन पालन को बढ़ावा देने, शहद व अन्य कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और विपणन पर दिया गया, ताकि किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिल सके।
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक श्री गिरीश चंद्र पंत ने एफपीओ की संरचना, पारदर्शी लेखा प्रणाली और सक्रिय सदस्य सहभागिता को सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने निदेशक मंडल के नियमित प्रशिक्षण, वित्तीय प्रबंधन और विपणन कौशल पर बल दिया। साथ ही नाबार्ड की विभिन्न वित्तीय सहायता, ऋण एवं अनुदान योजनाओं की जानकारी भी साझा की।
वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. पी. एस. कनवाल ने वैज्ञानिक विधि से मौन पालन, रोग प्रबंधन, आधुनिक बॉक्स तकनीक एवं गुणवत्तापूर्ण शहद उत्पादन पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में सामूहिक संग्रह, प्रोसेसिंग और विपणन के माध्यम से शहद उत्पादन किसानों के लिए स्थायी आय का मजबूत स्रोत बन सकता है।
उद्यान विभाग की सहायक विकास अधिकारी रेनु अधिकारी ने उद्यान उत्पादों के प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और स्थानीय ब्रांड विकसित करने की आवश्यकता बताई तथा ई-मार्केटिंग और ई-नाम से जुड़ने की सलाह दी। सहकारिता विभाग की ओर से नेहा जोशी ने एफपीओ को व्यवसायिक इकाई के रूप में विकसित करने, दीर्घकालिक बिजनेस प्लान, जोखिम प्रबंधन तथा युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर बल दिया।
कार्यशाला में एफपीओ प्रतिनिधियों के साथ ग्राम भितारकोट, मझोली और कफलना के कृषक एवं मौन पालक भी मौजूद रहे। बैठक में संगठनात्मक मजबूती, आय सृजन की संभावनाओं तथा भविष्य की कार्ययोजना पर मंथन किया गया।
अंत में संस्था के मुख्य कार्यकारी शंभू दत्त जोशी ने कहा कि प्रस्तावित एफपीओ को नाबार्ड के सहयोग से सशक्त बनाने की दिशा में यह कार्यशाला एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों, विशेषज्ञों और किसानों का आभार व्यक्त करते हुए आशा जताई कि इस पहल से क्षेत्र में सतत कृषि विकास और ग्रामीण आजीविका को नई गति मिलेगी।