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जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड सरकार लोगो का पलायन नहीं रोक सकी जिस कारण लगातार गॉव के गॉव लगातार खाली होते जा रहे है, गॉवो के लगातार खाली होने का कारण ग्रामीण क्षेत्रो में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क के साथ अन्य मूलभूत सुविधाओं का आभाव होना है.


ग्रामीण लोग शहर की और पलायन के कई कारण हो सकते हैं। कुछ प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते.

👉शहरों में रोजगार के अधिक अवसर होते हैं और लोग अधिक आय कमाने की आशा के साथ शहरों में पलायन करते हैं।

👉शहरों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की अधिक उपलब्धता होती है, जो लोगों को अधिकतम सेवाओं और सुविधाओं के लिए शहरों की ओर आकर्षित करता है।

👉शहरों में बेहतर अनुकूलता और सामाजिक संगठन की संभावना होती है, जो लोगों को शहरों में अपने जीवन को सुधारने के लिए प्रेरित करता है।

👉 शहरों में व्यापारिक, निवेश और करियर के अधिक अवसर होते हैं, जो लोगों को अधिक आर्थिक संभावनाओं के लिए शहरों की ओर आकर्षित करता है।

👉शहरों में बुनियादी सुविधाएँ जैसे कि पानी, बिजली, सड़क, और संचार की अधिक सुविधा होती है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं होती हैं।

देवताओ का पलायन (केदारनाथ और गोलू देवता )

इसी कड़ी में जो उत्तराखण्ड के लोग पूर्व में पलायन कर चुके है और खुद को शहर का समझकर अपने गॉव या पहाड़ नहीं आना चाहते अब सरकार के साथ मिलकर देवताओ के पलायन में लगे है इसी कड़ी के पहले चरण में बाबा केदारनाथ और गोलू देवता के मदिर दिल्ली में बनने जा रहे है, केदारनाथ धाम के दिल्ली में बनने का तो विरोध शुरू भी हो चुका है.

आखिर क्या है केदारनाथ विवाद की वजह क्या है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘केदारनाथ धाम ट्रस्ट बुराड़ी के अध्यक्ष सुरेंद्र रौतेला का हाल ही में दिया गया बयान ही इस सारे विवाद की वजह बना. सुरेंद्र रौतेला ने कहा, जो बुजुर्ग केदारनाथ धाम जाने में असमर्थ हैं, वो अब दिल्ली में बाबा के दर्शन कर सकेंगे.’

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री का केदारनाथ मंदिर उद्घाटन में शामिल होना दुर्भाग्यपूर्ण

दिल्ली के बुराड़ी में बन रहे केदारनाथ मंदिर पर जारी विवाद हर गुजरते दिन के साथ और गहराता जा रहा है. दिल्ली में बीते बुधवार (10 जुलाई, 2024) को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केदारनाथ मंदिर के भूमि-पूजन कार्यक्रम में हिस्सा लिया और इसका शिलान्यास किया. उस समय उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री धामी जो शिलान्यास के दिन केदारनाथ मंदिर बनने के फायदे गिना रहे थे चारधाम ट्रस्ट के विरोध के बाद उनके भी बदले सुर दिखे. बता दें कि बीते बुधवार को दिल्ली में भगवान केदारनाथ के प्रतीकात्मक मंदिर निर्माण का भूमि पूजन किया गया है, इसके बाद केदारघाटी की जनता और केदारनाथ का पंडा समाज आहत और आक्रोशित है।उस दौरान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ राज्यमंत्री अजय टम्टा, महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी महाराज,अल्मोड़ा सल्ट से विधायक महेश जीना, रानीखेत के विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल और केदारनाथ धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष सुरेंद्र रौतेला भी मौजूद थे।

क्या बोले मुख्यमंत्री धामी?

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केदारनाथ मंदिर पर उपजे विवाद के बाद कहा, ‘प्रतीकात्मक रूप में अनेक स्थानों पर मंदिरों का निर्माण हुआ है, लेकिन वो धाम का स्थान नहीं ले सकते हैं.’ धामी बोले, बाबा केदार का धाम उत्तराखंड में है और ये कहीं और नहीं बन सकता.’ इस संबंध में सीएम धामी ने समिति को भी उचित दिशा-निर्देश दिए हैं.

तीर्थ पुरोहितों ने जताई आपत्ति

वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में केदारनाथ धाम की अनुकृति बनाए जाने का विरोध भी ज़ोर-शोर से किया जा रहा है. केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित लगातार इसके विरोध में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. इस मामले में कार्रवाई नहीं होने पर तीर्थ पुरोहित समाज के साथ चार धाम महापंचायत ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है.

तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि दिल्ली में केदारनाथ मंदिर का निर्माण धार्मिक परम्परा के विपरीत है. सनातन परंपराओं के खिलाफ इसका निर्माण किया जा रहा है. बाबा का वास हिमालय में है और आप उस नाम का दुरुपयोग न करें. इस प्रकार के कार्य को शीघ्र बंद किया जाए. मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग ने कहा कि यह नर-नारायण की तपोभूमि है. ये पांडवों और भगवान श्रीकृष्ण की तपोभूमि है. इसके नाम को खराब न करें. अगर हमारी बात नहीं मानी गई तो हम सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने भी जताया विरोध

वहीं देश के बड़े संत भी इसके विरोध में है। इस मामले पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि केदारनाथ धाम हमारे बारह ज्योतिर्लिंग में एक हैं। उनका पता सिर्फ हिमालय में बताया गया है। उनके नाम पर कोई मंदिर का निर्माण किया जाना और हूबहू वैसा ही मंदिर बनाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि हम भगवान शिव के मंदिर बनाने का विरोध नहीं करते। लेकिन केदारनाथ धाम की प्रति बनाकर यह कहना कि जो वहां नहीं जा सकते। यहां आकर पूजा कर ले,ये उचित नहीं है।

श्रीकेदारनाथ धाम ट्रस्ट बुराड़ी की सफाई

श्रीकेदारनाथ धाम ट्रस्ट बुराड़ी ने विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि दिल्ली में केदारनाथ धाम नहीं, बल्कि केदारनाथ मंदिर का निर्माण हो रहा है और उसका उत्तराखंड सरकार से कोई भी लेना-देना नहीं है. जैसा की विदित है कि श्रीकेदारनाथ धाम ट्रस्ट के अनुरोध करने के बाद ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी केदारनाथ मंदिर के भूमिपूजन में शामिल हुए.