जनतानामा दिनेश भट्ट अल्मोड़ा उत्तराखंड
आइये जाने माने गीतकार गुलशन बावरा की जीवनी
सिनेमा पर एक नजर गीतकार अभिनेता गायक 70 और 80 दशक के जाने-माने गीतकार का एक किस्सा भी मशहूर रहा हैँ एक फिल्म के सैट पर अदाकारा मीना कुमारी ने कहा ये लड़का अजीब सी कमीज पहने हे कौन संगीतकार कल्याण जी भाई ने कहा है कोई बावरा हैँ उस दिन से गुलशन कुमार मेहता जिनका बाद में उनका नाम बदल कर गुलशन बावरा रख दिया था । उनका जन्म 12 अप्रैल सन् 1937 को शेखपुरा पंजाब जो पाकिस्तान में हुआ था देश विभाजन होने के बाद इनका परिवार दिल्ली आ गया। गुलशन बावरा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद थिएटर में दाखिला लिया । गुलशन बावरा की बतौर गीतकार पहली फिल्म साल 1964 में आयी चित्रलेखा थी। उसके बाद साल 1968 में आयी भारत कुमार यानी मनोज कुमार की आयी फिल्म उपकार गाने के बोल “मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती” उस वक्त काफी मसहूर हुआ था। इस फिल्म से गुलशन बावरा को बतौर गीतकार के रूप में मकबूलीयत हासिल हुई थी। उसके बाद साल 1973 में सदी के महा नायक अमिताभ बच्चन की पहली हिट फिल्म प्रकाश मेहरा के डारेक्सन में बनी जंजीर में उन्होंने एक गाने में एक्टिंग की गाने के बोल थे “दीवाने हैं दीवानो को ना घर चाहिए” और साथ ही फिल्म जंजीर के सफलता से गुलशन बावरा का कद काफी बढ़ चुका था। 70 और 80 के दशक में संगीतकार पंचम यानी राहुल देव बर्मन और गुलशन बावरा ने एक साथ कई फिल्में एक साथ की थी बतौर गीतकार उन्होंने 200 फिल्मो के लिए गाने लिखे। आख़री 90 दशक तक उन्होंने हिंदी फिल्मों में गीत लिखे। फिल्म उपकार,जंजीर, झूठा कहीं का , खेल खेल में,सत्ते पे सत्ता, आदि फिल्मों में गाने लिखे थे 7 अगस्त 2009 को ऐ महान गीतकार दुनिया से रुखसत हो गया और साथ ही अपने पीछे यादें गीतों के माध्यम से छोड़ गया।
