जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड़
कल सशक्त भू-कानून को लेकर राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है, जो एक लंबी लड़ाई का परिणाम है। इस संघर्ष में राज्य आंदोलनकारियों और प्रदेश के विभिन्न संगठनों के आंदोलनकारीयों की भूमिका अहम रही है। इस मौके पर राज्य आंदोलनकारी राजेंद्र नेगी जी का उत्तराखंड जनकल्याण समिति, धनगढ़ी संघर्ष समिति और सुनील टम्टा कुमाऊं सह-संयोजक मूलनिवासी भू-कानून संघर्ष समिति उत्तराखंड द्वारा फूल मालाओं से स्वागत किया गया।

नेगी जी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि, “इकु-खत बाजार में 15 दिनों तक लगातार अनशन करने के बाद सरकार को जागने के लिए मजबूर किया, जिसका श्रेय सिर्फ आंदोलनकारियों को जाता है। साथ ही, सरकार का भी आभार व्यक्त किया।”
सुनील टम्टा ने कहा, “सरकार देर से आई, स्वागत योग्य कदम है । अब आगे भी मूलनिवासी और स्थाई राजधानी गैरसैंण की लड़ाई जारी रहेगी, जिसमें स्थानीय मुद्दे भी शामिल हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार भू-कानून के ड्राफ्ट को आंदोलनकारियों के साथ मिलकर तैयार करे और अगर कोई संशोधन करना हो, तो उसे भी किया जा सकता है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भू-माफियाओं के लिए कोई रास्ता न छोड़ा जाए, ताकि भविष्य में सरकार और आंदोलनकारियों दोनों को जनता के बीच कोई समस्या न हो। इस संशोधन विधेयक का ड्राफ्ट जनता के बीच जनसमीक्षा के लिए रखा जाना चाहिए, ताकि जनपक्षीय और माफिया पक्षीय कानूनों में स्पष्टता के साथ जानकारी और विश्लेषण किया जा सके।
इस अवसर पर मोहन सिंह (उपाध्यक्ष व्यापार मंडल), आनंद राम (पूर्व प्रधान), दिवान सिंह, नंदन सिंह, पूरन राम, उदुली देवी, रितिका टम्टा (पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य) उपस्थित रहे।