जनतानामा न्यूज अल्मोड़ा उत्तराखण्ड
अल्मोड़ा सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट संजय पाण्डे ने अल्मोड़ा में पत्रकारिता के गिरते स्तर को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी बताया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, क्योंकि यही वह माध्यम है जो सत्ता को आईना दिखाने और समाज की सच्चाई सामने लाने का काम करता है।
संजय पाण्डे ने कहा कि एक समय था जब पत्रकारिता सत्य, साहस और जनसेवा का प्रतीक मानी जाती थी। उस दौर में पत्रकार सत्ता से सवाल करने से नहीं डरते थे और जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठाते थे। खबरें समाज को जागरूक करने और व्यवस्था में सुधार लाने का माध्यम बनती थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज कुछ स्थानों पर पत्रकारिता अपने मूल उद्देश्य से भटकती दिखाई दे रही है। टीआरपी और प्रसिद्धि की दौड़ में कई बार सच्चाई को पीछे छोड़ दिया जाता है। बिना सत्यापन के खबरें प्रसारित करना, पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग करना और निजी हितों को प्राथमिकता देना पत्रकारिता की विश्वसनीयता को कमजोर कर रहा है।
संजय पाण्डे ने कहा कि जब पत्रकारिता सच के बजाय प्रभाव और दबाव के आगे झुकने लगती है तो समाज का विश्वास भी डगमगाने लगता है। यह स्थिति केवल पत्रकारिता के लिए ही नहीं बल्कि पूरे लोकतंत्र के लिए खतरे का संकेत है।
हालांकि उन्होंने कहा कि आज भी कई पत्रकार ईमानदारी, साहस और निष्ठा के साथ सच को सामने लाने का कार्य कर रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि पत्रकारिता फिर से अपने मूल धर्म—सत्य, निष्पक्षता और जनहित—को सर्वोपरि रखे।
उन्होंने कहा कि “जब कलम बिकने लगती है तो सच की आवाज दबने लगती है, और जब सच दब जाता है तो लोकतंत्र कमजोर होने लगता है।”
