जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड
अल्मोड़ा क्वारब में पहाड़ी से पत्थर गिरने से युवक के गंभीर रूप से घायल होने की ताज़ा घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यह हादसा नहीं, बल्कि सरकार द्वारा रचा गया सुनियोजित खतरा है। वर्षों से यह मार्ग भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाओं का गवाह बन रहा है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी की सरकार नींद में नहीं, बल्कि जानबूझकर आंख मूंदे बैठी है।
सड़क नहीं, मौत का गलियारा — और सरकार मौन
क्वारब की सड़क आज आम जनता के लिए सफ़र का रास्ता नहीं, बल्कि जिंदगी और मौत के बीच का जुआ बन चुकी है। हर गुजरता वाहन एक सवाल पूछता है—आज किसकी बारी है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार के मंत्री और जिम्मेदार नेता एसी हॉलों में सम्मेलन, भाषण और प्रचार में व्यस्त हैं, जबकि पहाड़ से गिरते पत्थर हर दिन जनता की जान पर हमला कर रहे हैं।
“यह शासन नहीं, खुला अपराध है” — भुवन चन्द्र जोशी
आम आदमी पार्टी के नेता भुवन चन्द्र जोशी ने सरकार पर सीधा और तीखा प्रहार करते हुए कहा—
“क्वारब में बार-बार हो रही दुर्घटनाएं संयोग नहीं, बल्कि भाजपा सरकार की आपराधिक और अमानवीय लापरवाही का नतीजा हैं। जब सरकार को पहले से खतरे का पता है और फिर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तो यह लापरवाही नहीं — जनता की जान से खिलवाड़ है। यह शासन नहीं, यह संवेदनहीन सत्ता का नंगा चेहरा है।”
उन्होंने कहा कि सरकार केवल तब हरकत में आती है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है, फोटो खिंच जाती है और फिर सब कुछ भूल दिया जाता है।
अब मांग नहीं, चेतावनी
भुवन चन्द्र जोशी ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
घायल युवक को तत्काल, निःशुल्क और उच्चस्तरीय इलाज दिया जाए।
पीड़ित परिवार को सम्मानजनक मुआवज़ा मिले।
क्वारब क्षेत्र में तुरंत भू-वैज्ञानिक सर्वे कर स्थायी सुरक्षा दी जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो।
अब चुप्पी नहीं, विस्फोटक जनआक्रोश
उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अब भी आंखें मूंदे रखीं, तो कांग्रेस पार्टी सहित समस्त विपक्ष और आम जनता सड़क से सदन तक उग्र जनआंदोलन छेड़ने को बाध्य होगी।
अब सवाल साफ और सीधा है—
क्या सरकार किसी की मौत का इंतज़ार कर रही है, या क्वारब को यूं ही “दुर्घटना क्षेत्र” घोषित कर हाथ झाड़ चुकी है?
