जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड
अल्मोड़ा अल्मोड़ा विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव मनोज तिवारी ने प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य विभाग में किए गए बड़े पैमाने पर चिकित्सकों के स्थानांतरण पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा कुठाराघात बताते हुए कहा कि इस निर्णय से पहले से ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे पहाड़ी जिलों की स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक प्रभावित होगी।
प्रेस को जारी बयान में विधायक ने कहा कि अल्मोड़ा जिला चिकित्सालय सहित प्रदेश के कई पर्वतीय जनपदों से एक साथ बड़ी संख्या में चिकित्सकों का तबादला कर दिया गया है। इससे मरीजों के उपचार पर गंभीर असर पड़ेगा और अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं का संकट और गहरा जाएगा।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पताल वर्षों से विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में डॉक्टरों का एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण करना अव्यावहारिक और जनहित के विपरीत निर्णय है। जिन चिकित्सकों का तबादला किया गया है, वे लंबे समय से दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देकर स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रहे थे।
मनोज तिवारी ने कहा कि स्थानांतरण केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे चिकित्सकों के परिवार, बच्चों की शिक्षा और सामाजिक जीवन पर भी असर पड़ता है। सरकार को स्थानांतरण नीति बनाते समय इन मानवीय पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से अल्मोड़ा जिला चिकित्सालय का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां से चार विशेषज्ञ चिकित्सकों सहित कुल छह डॉक्टरों का स्थानांतरण किया गया है। इससे जिले के सबसे बड़े अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी और दूर-दराज़ क्षेत्रों से आने वाले हजारों मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
विधायक ने कहा कि सरकार एक ओर पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने के दावे करती है, जबकि दूसरी ओर बड़ी संख्या में चिकित्सकों के तबादले कर अपने ही दावों को कमजोर कर रही है। उन्होंने मांग की कि पहले रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएं और उसके बाद आवश्यकता के अनुसार स्थानांतरण किए जाएं।
उन्होंने प्रदेश सरकार से पर्वतीय जनपदों से किए गए सभी स्थानांतरण आदेशों की तत्काल समीक्षा कर उन्हें निरस्त करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनता की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की अनदेखी जारी रखी और तबादला आदेश वापस नहीं लिए, तो वे जनहित में व्यापक आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी व्यवस्था के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
