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जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड

अल्मोड़ा उत्तराखंड सरकार द्वारा सरकारी विभागों की भूमि एवं संपत्तियों को लीज पर देने तथा पीपीपी मोड के माध्यम से निजी क्षेत्र को सौंपने की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज ने आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश की बेशकीमती सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन केवल सरकार की संपत्ति नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की अमानत है।
भोज ने कहा कि सरकारी विभागों की बहुमूल्य जमीनों को लंबे समय के लिए लीज पर देने से पहले सरकार को पूरी प्रक्रिया जनता के सामने पारदर्शी तरीके से रखनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि कौन-कौन सी जमीनें किस व्यक्ति अथवा कंपनी को, कितनी अवधि के लिए और किन शर्तों पर दी जा रही हैं।
उन्होंने मसूरी स्थित पार्क एस्टेट (हाथीपांव) की लगभग 142 एकड़ भूमि को कथित तौर पर 15 वर्षों की लीज पर दिए जाने के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सरकारी भूमि का बाजार मूल्य हजारों करोड़ रुपये है और उसे कम वार्षिक लीज राशि पर लंबे समय के लिए दिया जा रहा है, तो सरकार को इसकी पूरी प्रक्रिया, मूल्यांकन और वित्तीय औचित्य सार्वजनिक करना चाहिए।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (UIIDB) को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के माध्यम से सरकारी जमीनों और संपत्तियों को निजी क्षेत्र के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आसान की जा रही है। भोज ने कहा कि कांग्रेस को आशंका है कि यदि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो इसका लाभ जनहित के बजाय चुनिंदा निजी कंपनियों को मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में युवाओं, किसानों और आम जनता को रोजगार, कारोबार तथा विकास के लिए जमीन की आवश्यकता है। ऐसे में बेशकीमती सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने के फैसलों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। भोज ने इसे सरकारी संपत्तियों के निजीकरण की दिशा में उठाया जा रहा कदम बताया।
भोज ने कहा कि नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में सरकारी जमीन और संपत्तियां बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन संपत्तियों के संबंध में लिए जा रहे निर्णयों का दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी लीज एवं पीपीपी प्रस्तावों, निविदाओं, संपत्तियों के बाजार मूल्य, लीज राशि, लीज अवधि, शर्तों और लाभार्थी कंपनियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
उन्होंने कहा कि जिन सरकारी संपत्तियों का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन अथवा अन्य जनहितकारी कार्यों के लिए किया जा सकता है, उनका इस्तेमाल निजी हितों के बजाय सार्वजनिक हित में किया जाना चाहिए।
भोज ने चेतावनी दी कि सरकारी जमीन और संपत्तियों को कम मूल्य पर निजी हाथों में सौंपने की किसी भी कोशिश का कांग्रेस विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस मामले में पारदर्शिता नहीं बरती तो कांग्रेस जनता के बीच जाकर इस मुद्दे को उठाएगी और सड़क से सदन तक सरकार से जवाब मांगेगी।