जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड
अल्मोड़ा, मोहान वन क्षेत्र के गोदी अनुभाग के अंतर्गत ग्राम सभा डबरा सौराल के तोक घोड़ीधार में 03 अगस्त को हुई मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना के बाद वन विभाग ने लगातार एक माह तक व्यापक निगरानी और रेस्क्यू अभियान चलाया। अभियान के दौरान ट्रैप कैमरों, ड्रोन और गश्ती टीमों की मदद से बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
वन विभाग की टीमों ने क्षेत्र में बाघ के पगमार्क एवं अन्य वन्यजीव गतिविधियों के चिन्हों की तलाश के साथ नियमित गश्त की। ग्रामीणों को भी वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और आवश्यक सावधानियां बरतने के लिए जागरूक किया गया। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर पोस्टर एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
बाघ के सुरक्षित रेस्क्यू के लिए पिंजरे, ट्रैंक्विलाइजिंग गन, जाल समेत आवश्यक उपकरणों के साथ मोहान वन क्षेत्र एवं पश्चिमी वृत्त की रेस्क्यू विशेषज्ञ टीम को तैनात किया गया। अभियान को व्यापक बनाते हुए रानीखेत, अल्मोड़ा, जौरासी, भूमि संरक्षण रामनगर और मंदाल रेंज, कालागढ़ टाइगर रिजर्व के वन कर्मियों को भी अभियान में शामिल किया गया।
नैनीताल वन प्रभाग के डॉ. हिमांशु पांगती, पश्चिमी वृत्त के डॉ. राहुल सती और मोहान रेंज के वन कर्मियों की संयुक्त टीम ने लगातार रेस्क्यू अभियान संचालित किया। वन विभाग के अथक प्रयासों और सघन निगरानी के बाद 02 सितंबर की रात करीब 11 बजे क्षेत्र से एक वयस्क बाघ का सफल एवं सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया।
रेस्क्यू के बाद बाघ को आवश्यक चिकित्सीय एवं स्वास्थ्य परीक्षण के लिए रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है। बाघ के सुरक्षित रेस्क्यू से क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावित स्थिति को नियंत्रित करने में वन विभाग को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बाघ के रेस्क्यू से स्थानीय ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली है। वन विभाग द्वारा क्षेत्र में निगरानी और आवश्यक सतर्कता आगे भी जारी रखी जाएगी।