जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड
दन्या (अल्मोड़ा) राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय काण्ड़ानौला को ध्याड़ी क्लस्टर विद्यालय में समायोजित किए जाने के कथित मौखिक आदेशों का शिक्षक-अभिभावक संघ, विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध किया है। इस संबंध में आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर प्रधानाचार्य के माध्यम से जिलाधिकारी तथा खंड शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन भेजकर समायोजन का निर्णय वापस लेने की मांग की गई।


बैठक में वक्ताओं ने शिक्षा विभाग के इस निर्णय को ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसे “तुगलकी फरमान” करार दिया। अभिभावकों ने चेतावनी दी कि यदि विद्यालय का समायोजन किया गया तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
अभिभावक संघ के अध्यक्ष बसंत बल्लभ पांडे ने कहा कि इस विद्यालय की स्थापना दया कृष्ण काण्डपाल ने आर्य समाज की प्रेरणा से निजी विद्यालय के रूप में की थी। बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन.डी. तिवारी के कार्यकाल में ग्रामीणों की मांग पर इसे राजकीय विद्यालय का दर्जा मिला। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इस विद्यालय का समायोजन ग्रामीणों की भावनाओं और बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है।
शिक्षक-अभिभावक संघ की अध्यक्ष नीमा काण्डपाल ने कहा कि यदि बच्चों को गांव से बाहर ही पढ़ाई के लिए जाना पड़े तो वे अपनी सुविधा के अनुसार अन्य विद्यालयों का चयन करेंगे। ऐसे में जबरन क्लस्टर विद्यालय में समायोजन उचित नहीं है।
पशु कल्याण बोर्ड के सदस्य दया कृष्ण काण्डपाल ने कहा कि वर्ष 2003 में उन्होंने इस विद्यालय की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि सभी बच्चे सड़क किनारे रहने वाले नहीं हैं। क्लस्टर विद्यालय तक आने-जाने में बच्चों का समय नष्ट होगा और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ेगा।
कर्मचारी नेता चन्द्रमणि भट्ट ने कहा कि तकनीकी युग में विद्यालयों के समायोजन की नीति व्यावहारिक नहीं है। वहीं ग्राम प्रधान सूरज कुमार ने स्पष्ट कहा कि किसी भी कीमत पर विद्यालय का समायोजन नहीं होने दिया जाएगा।
बैठक में गणेश काण्डपाल, शिवदत्त काण्डपाल, हरीश राम, कृष्णानंद काण्डपाल, भवानी दत्त, सुनील कुमार, धीरज रंगोड़ा, दिवाकर रंगोड़ा, विपिन रंगोड़ा, हेमा काण्डपाल, जगत सिंह, खड़क सिंह, नीता देवी सहित 50 से अधिक अभिभावक, एसएमसी सचिव किरण जोशी, शिक्षक अनिल कुमार साहू, चारू चन्द्र पंत, यामिनी आर्या, निकिता चन्द्र समेत अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।