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जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड

अल्मोड़ा मोहान वन क्षेत्र के डबरा सौराल, तड़म एवं काठ की नाव क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम को लेकर वन विभाग ने निगरानी और बाघ रेस्क्यू अभियान तेज कर दिया है। उप प्रभागीय वनाधिकारी रानीखेत द्वारा गठित टीमें लगातार संवेदनशील क्षेत्रों में कैंप कर बाघ की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं और उसे सुरक्षित रेस्क्यू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
अल्मोड़ा एसडीओ, वन विभाग काकुल पुंडीर ने बताया कि क्षेत्र में लगातार गश्त एवं निगरानी के साथ ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। डबरा सौराल और सौराल ग्राम सभा के रास्तों एवं पथमार्गों में झाड़ी कटान का कार्य भी कराया जा रहा है, ताकि वन्यजीव की गतिविधियों पर निगरानी आसान हो सके।
उन्होंने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीवों के पगमार्ग और अन्य गतिविधियों की पहचान की जा रही है। बाघ को रेस्क्यू करने के लिए 6 पिंजरे लगाए गए हैं। बाघ की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए 2 ड्रोन, 2 लाइव कैमरे और 31 कैमरा ट्रैप सहित अन्य उपकरण लगाए गए हैं। गश्ती दल नियमित रूप से पिंजरों, कैमरा ट्रैप और अन्य उपकरणों की जांच कर रहे हैं।
वन विभाग की टीमों द्वारा क्षेत्र में एनाइडर, फॉक्स लाइट, राइफल और गांधी बंदूक सहित सुरक्षा उपकरणों का भी प्रयोग किया जा रहा है। रेस्क्यू टीम बाघ की गतिविधियों को लगातार ट्रैक कर उसके सुरक्षित रेस्क्यू की रणनीति तैयार कर रही है।
ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए गांवों में पोस्टर लगाए जा रहे हैं तथा लाउडस्पीकर के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। इसके अलावा जनजागरूकता गोष्ठियों का आयोजन कर लोगों से संवेदनशील क्षेत्रों में अकेले न जाने और सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
बाघ के रेस्क्यू अभियान में कॉर्बेट की विशेषज्ञ टीम का भी सहयोग लिया जा रहा है। डॉक्टरों की टीम रेस्क्यू टीम के साथ लगातार अभियान में जुटी हुई है।
गश्त, निगरानी, जागरूकता एवं प्रचार-प्रसार अभियान में रामनगर वन प्रभाग, कालागढ़ टाइगर रिजर्व तथा अल्मोड़ा वन प्रभाग की रानीखेत, जौरासी, द्वाराहाट और अल्मोड़ा रेंज की टीमें क्षेत्र में कैंप कर सहयोग कर रही हैं। वन विभाग का प्रयास है कि बाघ को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को कम किया जा सके।