जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड
कृषि विभाग की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला कोसी मिट्टी की जांच कर मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में हो रही कारगर सिद्ध

किसान आवश्यकतानुसार पोषक तत्वों का प्रयोग कर ले रहे अच्छी फसल तथा खर्च में भी कमी आने से धन को हो रही बचत
अल्मोड़ा, 27 सितंबर 2024 कृषि विभाग अल्मोड़ा द्वारा कृषकों के खेतों में पोषक तत्वों की उपलब्धता की जांच करने व पोषक तत्वों की कमी के अनुरूप खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग सुनिश्चित करने हेतु वर्ष 2024-25 में कुल 9000 मिट्टी के नमूने विभाग की कोसी स्थित प्रयोगशाला में जांच करने का लक्ष्य रखा गया है। जनपद में आंकाक्षी विकासखण्ड के रूप में चयनित विकासखण्ड स्याल्दे के 670 नमूनों का शत्-प्रतिशत विश्लेषण कर अल्मोड़ा जनपद ने प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
मिट्टी के नमूना परीक्षण की प्रकिया में कुल 12 मानकों के आधार पर मिट्टी की जांच की जाती है. जिसने नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, जिंक, लोहा, कॉपर मैगनीज, बोरॉन, तत्वों एवं पीएच, ईसी एवं ओसी की स्थिति की जांच कर किस मिट्टी हेतु कितनी मात्रा में खाद एवं उर्वरक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता होगी इसकी सम्पूर्ण जानकारी मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से सम्बन्धित कृषकों को उपलब्ध करायी जाती है ताकि भूमि में पोषक तत्वों की उपलब्धता के अनुसार फसल का चयन हो सके व कमी की पूर्ति हेतु आवश्यक खाद व उर्वरक प्रयोग किया जा सके। जनपद में मुख्यतः अधिकांश नमूनों में जहां पोटाश की पर्याप्त उपलब्धता पायी गयी हैं, वही नाइट्रोजन, फास्फोरस, सल्फर, जिंक, लोहा, कॉपर, मैगनीज, बोरॉन, तत्वों की मध्यम उपलब्धता है। ऑर्गेनिक कार्बन भी विगत वर्षों में लगातार कम हो रहा है, जिसके निदान हेतु कृषि विभाग द्वारा पर्याप्त मात्रा में कम्पोस्ट का प्रयोग करने की सलाह कृषकों दी जा रही है।
जनपदीय प्रयोगशाला को विगत वर्षों में नवीनतम उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। जिसके फलस्वरूप विभिन्न मानकों के परीक्षण जनपद में ही उपलब्ध है। विभाग द्वारा केन्द्रीय विद्यालयः अल्मोड़ा के छात्रों को मिट्टी परीक्षण का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। ताकि छात्र उक्त प्रशिक्षण का अपने व्यवहारिक जीवन में उपयोग कर सके।
मुख्य कृषि अधिकारी विनोद शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि जनपद के समस्त कृषक निर्धारित शुल्क देकर अपनी मिट्टी का परीक्षण प्रयोगशाला में करा सकते है। मिट्टी का परीक्षण कर तद्नुसार फसलों का चयन व मिट्टी में उर्वरता की कमी का पता लगाकर उपयुक्त खाद व पोषक तत्वों का प्रयोग कर कृषकों द्वारा कृषि उत्पादन के क्षेत्र में व्यापक सुधार लाया जा सकता है।