जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड
अल्मोड़ा पहाड़ के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शुमार सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा में रक्त की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला एक 12 वर्षीय बालिका का है, जिसे उपचार के दौरान रक्त की आवश्यकता पड़ी, लेकिन ब्लड बैंक से रक्त उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण रात करीब 10 बजे उसे रेफर कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि जब रेडक्रॉस के पदाधिकारी बालिका के लिए रक्तदाता लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंच गए, तब भी बालिका को रेफर कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आक्रोशित रेडक्रॉस पदाधिकारियों ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
जब रक्तदाता पहुंच गया, फिर क्यों किया गया रेफर?
जानकारी के अनुसार, 12 वर्षीय बालिका को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा लाया गया था। उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उसे रक्त की आवश्यकता बताई, लेकिन परिजनों को ब्लड बैंक से रक्त उपलब्ध नहीं हो पाया। इसके बाद रेडक्रॉस के पदाधिकारियों ने पहल करते हुए रक्तदाता की व्यवस्था की और बालिका की मदद के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे। इसके बावजूद रात करीब 10 बजे बालिका को रेफर कर दिया गया।
इस घटनाक्रम ने सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब रक्तदाता उपलब्ध कराने की पहल हो चुकी थी, तो बालिका को रेफर करने की नौबत क्यों आई? क्या रक्त उपलब्ध कराने के सभी विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया गया? क्या आपातकालीन स्थिति में मरीज को राहत देने के लिए आवश्यक समन्वय किया गया? रेडक्रॉस ने इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली पर रेडक्रॉस का तीखा हमला
रेडक्रॉस पदाधिकारियों ने ब्लड बैंक की व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि रक्त की जरूरत पड़ने पर मरीज के तीमारदारों से ही डोनर की व्यवस्था करने को कहा जाता है। ऐसे में पहले से परेशान परिजनों को रक्तदाता तलाशने के लिए भागदौड़ करनी पड़ती है। आपातकालीन परिस्थितियों में यह परेशानी और गंभीर हो जाती है।
पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि यदि मरीज के परिजन ही रक्तदाता की व्यवस्था करने के लिए मजबूर हैं, तो ब्लड बैंक की उपलब्धता और आपातकालीन समन्वय की व्यवस्था कितनी प्रभावी है? हालांकि, रक्तदाता उपलब्ध होने के बाद भी बालिका को रेफर किए जाने के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
रेडक्रॉस का कहना है कि रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना और जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार दिलाने में सहयोग करना स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और मरीज को रेफर करने के कारणों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
रात में रेफरल, पहाड़ के मरीजों की परेशानी कौन समझेगा?
पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और दूरस्थ गांवों से अस्पताल तक पहुंचने की चुनौतियां किसी से छिपी नहीं हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज जैसे प्रमुख संस्थान में रात के समय मरीज को रेफर किए जाने का मामला लोगों की चिंता बढ़ाता है। रात में दूसरे अस्पताल तक पहुंचने के लिए वाहन, दूरी और समय जैसी चुनौतियां मरीज तथा उसके परिजनों की परेशानी बढ़ा सकती हैं।
रेडक्रॉस पदाधिकारियों का कहना है कि मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए ब्लड बैंक में रक्त की उपलब्धता, रक्तदाताओं के साथ समन्वय और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने की प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। यदि व्यवस्था में कोई कमी है, तो उसे दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
प्राचार्य को ज्ञापन, जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग
मामले से नाराज रेडक्रॉस पदाधिकारियों ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को ज्ञापन सौंपकर कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं। इनमें 12 वर्षीय बालिका को रेफर किए जाने के कारणों की निष्पक्ष जांच, रक्तदाता उपलब्ध कराने के बावजूद रेफरल की स्थिति पैदा होने के कारणों का पता लगाना, संबंधित चिकित्सकों और ब्लड बैंक की भूमिका की समीक्षा तथा आपातकालीन मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है।
रेडक्रॉस ने मांग की है कि जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या व्यवस्था संबंधी कमी सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, भविष्य में किसी भी मरीज को रक्त की उपलब्धता संबंधी समस्या के कारण अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े, इसके लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।
रेडक्रॉस की चेतावनी—व्यवस्था नहीं सुधरी तो होगा विरोध
रेडक्रॉस पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने और जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए संस्था लगातार प्रयास करती है। इसके बावजूद यदि रक्तदाता उपलब्ध कराने की पहल के बाद भी मरीज को रेफर किए जाने की स्थिति सामने आती है, तो इसकी गंभीरता से समीक्षा होनी चाहिए।
पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि भविष्य में रक्त की कमी के कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हुई, तो इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से ब्लड बैंक की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और आपातकालीन मरीजों के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
अब सवाल यह है कि रक्तदाता उपलब्ध कराने के बावजूद 12 वर्षीय बालिका को रात में रेफर क्यों किया गया? क्या मेडिकल कॉलेज प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएगा? फिलहाल रेडक्रॉस ने ज्ञापन सौंपकर जवाबदेही तय करने की मांग की है। मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
प्राचार्य से मिलने वालों में रेडक्रॉस प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज सनवाल, यूथ रेडक्रॉस चेयरमैन अमित साह मोनू, यूथ रेडक्रॉस सचिव मनोज भंडारी मंटू, यूथ रेडक्रॉस उपसचिव अभिषेक जोशी और ग्राम प्रधान विनोद जोशी शामिल रहे।
