जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड
अल्मोड़ा महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और समाज सुधारक पंडित हरगोविंद पंत की जयंती पर मंगलवार को अल्मोड़ा में प्रशासनिक उदासीनता का मामला सामने आया। जिस महापुरुष के नाम पर अल्मोड़ा जिला चिकित्सालय का नाम रखा गया है, उनकी प्रतिमा सुबह से बिना माल्यार्पण के उपेक्षित खड़ी रही। न जिला प्रशासन वहां पहुंचा और न ही अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें श्रद्धांजलि देने की पहल की।


स्थिति तब बदली जब अल्मोड़ा इंटर कॉलेज के प्रबंधक एवं वरिष्ठ शिक्षाविद सुशील कुमार जोशी स्वयं माला लेकर जिला चिकित्सालय पहुंचे। उनके आग्रह पर अस्पताल स्टाफ ने पंडित हरगोविंद पंत की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान मनमोहन बोरा, सुरक्षा अधिकारी हरीश सिंह बिष्ट और सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे भी मौजूद रहे।
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर नाराजगी दिखाई दी। लोगों का कहना था कि जिन महापुरुषों ने अपना पूरा जीवन समाज और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया, आज उनकी जयंती तक को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। लोगों ने यह भी कहा कि हर सार्वजनिक कार्यक्रम में सक्रिय दिखाई देने वाले कई जिम्मेदार लोग और परिजन भी इस अवसर पर अनुपस्थित रहे।
लोगों ने याद दिलाया कि इससे पहले भी प्रशासन स्वतंत्रता सेनानी विक्टर मोहन जोशी की जयंती को भूल चुका है। उस समय भी सामाजिक स्तर पर आगे आकर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करना पड़ा था।
पंडित हरगोविंद पंत का जन्म 19 मई 1885 को अल्मोड़ा जनपद के चितई गांव में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद अल्मोड़ा में वकालत शुरू की, लेकिन उनका जीवन केवल पेशे तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने “सोशल सर्विस लीग” की स्थापना कर शिक्षा, स्वच्छता और जनजागरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ उन्होंने छुआछूत, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी निरंतर संघर्ष किया।
जयंती के दिन दिखाई गई प्रशासनिक बेरुखी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समाज अपने महान विभूतियों के योगदान को धीरे-धीरे भूलता जा रहा है।