Mon. May 4th, 2026
Spread the love

जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड

देहरादून उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की तैनाती को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों और उपलब्ध अभिलेखों ने विभागीय कार्यप्रणाली की पारदर्शिता, निष्पक्षता और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला अब कथित “पोस्टिंग सिंडिकेट” के आरोपों तक पहुंच गया है।



जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी 30 स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की तैनाती सूची में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इनमें से 16 चिकित्सकों का उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण नहीं पाया गया, जबकि 2 चिकित्सकों के पीजी परीक्षा उत्तीर्ण न करने के आरोप हैं। इसके बावजूद इन चिकित्सकों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया।


सूत्रों के मुताबिक, डीजी हेल्थ और चिकित्सा सचिव की संस्तुतियों को नजरअंदाज किया गया, वहीं 13 चिकित्सकों के तैनाती स्थल अंतिम समय में बदल दिए गए। इससे तैनाती प्रक्रिया में उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की आशंका जताई जा रही है।
इस पूरे मामले का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता चन्द्र शेखर जोशी द्वारा प्राप्त सूचनाओं से हुआ है। दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि फाइलों में अंतिम समय में संशोधन किए गए और विभागीय सिफारिशों को दरकिनार किया गया। इससे “पोस्टिंग सिंडिकेट” जैसे गंभीर आरोपों को बल मिला है।
मामले को और संवेदनशील बनाता है एक कथित चिकित्सा लापरवाही का प्रकरण, जिसमें एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान एक प्रसूता की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद डॉ. नेहा सिद्दीकी की सितारगंज में गायनी विशेषज्ञ के रूप में तैनाती को लेकर उठ रहे सवाल और तेज हो गए हैं। हालांकि, यह मामला फिलहाल जांचाधीन है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद आम जनता के बीच कई सवाल उठ रहे हैं, जिनमें तैनाती प्रक्रिया की पारदर्शिता, योग्यता आधारित नियुक्ति और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रमुख हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह स्वास्थ्य तंत्र में व्यापक सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है। ऐसे में सरकार और संबंधित विभागों के सामने पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।