जनतानामा न्यूज़ अल्मोडा उत्तराखण्ड
अल्मोड़ा शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा विभिन्न स्थानों पर स्थापित कूड़ेदानों के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों का मुख्य उद्देश्य कूड़ा इधर-उधर फेंकने वालों पर नजर रखना और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना था। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यह व्यवस्था अपने उद्देश्य को पूरा करने में सफल नहीं हो पाई है।

शहर के कई प्रमुख स्थानों पर लगे कूड़ेदानों के आसपास आज भी गंदगी के ढेर देखे जा सकते हैं। लोग कूड़ेदान के भीतर कूड़ा डालने के बजाय उसके आसपास ही फेंक रहे हैं, जिससे स्वच्छता अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कैमरों के माध्यम से नियमित निगरानी की जा रही है तो फिर सार्वजनिक स्थानों पर फैली यह गंदगी क्यों दिखाई दे रही है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि कैमरे लगाए जाने के बाद अब तक कितने लोगों की पहचान की गई और कितनों के खिलाफ चालान या जुर्माने की कार्रवाई की गई। यदि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है तो कैमरों की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। नागरिकों का मानना है कि केवल कैमरे लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि उनके माध्यम से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर प्रभावी कार्रवाई भी जरूरी है।
नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर भी शहर में चर्चाओं का दौर जारी है। लोगों का आरोप है कि स्वच्छता अभियान केवल कागजों और प्रचार तक सीमित दिखाई देता है, जबकि धरातल पर अपेक्षित परिणाम नजर नहीं आ रहे हैं। शहर के कई क्षेत्रों में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था अभी भी चुनौती बनी हुई है।
इसी बीच नगर निगम के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि नगर निगम को स्थानीय स्तर पर त्वरित और प्रभावी निर्णय लेने चाहिए, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है। नागरिकों का मानना है कि स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर ठोस और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।
शहरवासियों का कहना है कि यदि नगर निगम वास्तव में अल्मोड़ा को स्वच्छ और सुंदर बनाना चाहता है तो केवल निगरानी व्यवस्था स्थापित करना पर्याप्त नहीं होगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि लोगों में नियमों के प्रति जागरूकता और भय दोनों उत्पन्न हो सके।
फिलहाल शहर के लोग यह जानना चाहते हैं कि करोड़ों रुपये की योजनाओं और स्वच्छता अभियानों के बीच आखिर कब वह दिन आएगा जब कूड़ेदानों के आसपास फैली गंदगी पूरी तरह समाप्त होगी और सीसीटीवी कैमरे केवल शोपीस नहीं बल्कि प्रभावी निगरानी और कार्रवाई का माध्यम बनेंगे।