Wed. Jun 10th, 2026
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जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड

अल्मोड़ा प्रदेश सरकार द्वारा आयुर्वेदिक चिकित्सकों की वर्षों पुरानी लंबित मांगों की लगातार अनदेखी किए जाने के विरोध में आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
आयुष प्रदेश के रूप में पहचान रखने वाले उत्तराखंड में आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने सरकार पर उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में सेवाएं देने के बावजूद उनकी जायज मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। वहीं आधार आधारित एवं मोबाइल एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने की अनिवार्यता से भी चिकित्सकों में नाराजगी है।
चिकित्सकों की प्रमुख मांगों में एसीपी (ACP), डीएसपी (DSP), संवर्ग निदेशक की नियुक्ति, विभागीय ढांचे का पुनर्गठन तथा वर्ष 2024 बैच के चिकित्सा अधिकारियों का स्थायीकरण शामिल है। लंबे समय से इन मांगों के लंबित रहने से प्रदेशभर के आयुर्वेदिक चिकित्सकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ, उत्तराखंड द्वारा घोषित चरणबद्ध आंदोलन के तहत जिला शाखा अल्मोड़ा के अध्यक्ष डॉ. कपिल शर्मा और सचिव डॉ. अनुपमा त्यागी के नेतृत्व में चिकित्सा अधिकारियों ने तीसरे दिन भी ओपीडी सेवाओं के दौरान काला फीता बांधकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार जल्द ही चिकित्सकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो प्रांतीय कार्यकारिणी के नेतृत्व में आंदोलन को अगले चरण में और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा चिकित्सकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए लंबित मांगों का शीघ्र समाधान करना चाहिए।