Wed. Jun 3rd, 2026
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जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड

देहरादून स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तराखंड से 31 मार्च 2026 को संयुक्त निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए डॉ. अजीत मोहन जौहरी को सेवानिवृत्ति के लगभग दो माह के भीतर उत्तराखंड आयुर्विज्ञान परिषद (यूएमसी) में कार्यवाहक डिप्टी रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
उत्तराखंड आयुर्विज्ञान परिषद द्वारा 29 मई 2026 को जारी आदेश संख्या 4158 के अनुसार डॉ. जौहरी को नियमित डिप्टी रजिस्ट्रार की नियुक्ति होने तक परिषद के दैनिक कार्यों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वर्तमान में डॉ. जौहरी परिषद के सदस्य भी हैं।
नियुक्ति के बाद प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं नियमों के अनुपालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट चन्द्रशेखर जोशी ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत परिषद से विस्तृत जानकारी मांगी है।
अपने आरटीआई आवेदन में जोशी ने नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव, नोटशीट, फाइल अभिलेख, नियमावली, चयन प्रक्रिया, बैठक की कार्यवाही (मिनट्स), रिक्त पद की स्थिति तथा पूर्व डिप्टी रजिस्ट्रार से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इसके अतिरिक्त डॉ. जौहरी की वर्तमान नियुक्ति, पदनाम, वेतनमान एवं उनसे संबंधित प्रशासनिक आदेशों की जानकारी भी मांगी गई है।
आरटीआई आवेदन में यह भी पूछा गया है कि डिप्टी रजिस्ट्रार के नियमित पद पर नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन जारी किया गया था या नहीं, क्या किसी चयन प्रक्रिया का पालन किया गया तथा क्या अन्य पात्र अभ्यर्थियों पर भी विचार किया गया। साथ ही यह जानने का प्रयास किया गया है कि कार्यवाहक डिप्टी रजिस्ट्रार के रूप में डॉ. जौहरी को कोई अतिरिक्त प्रशासनिक, वित्तीय अथवा वैधानिक अधिकार प्रदान किए गए हैं अथवा नहीं।
जोशी ने परिषद से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि वर्तमान व्यवस्था केवल अंतरिम है या नियमित नियुक्ति तक जारी रहेगी तथा नियमित नियुक्ति के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
गौरतलब है कि राज्य के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों में शामिल रहे डॉ. अजीत मोहन जौहरी को सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व दिए जाने से स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक हलकों में चर्चा का माहौल है। अब निगाहें परिषद द्वारा आरटीआई के जवाब में उपलब्ध कराए जाने वाले अभिलेखों पर टिकी हैं, जिनसे यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियुक्ति प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और पारदर्शिता के मानकों का किस सीमा तक पालन किया गया।