Wed. Jul 22nd, 2026
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जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड

अल्मोड़ा बेस अस्पताल में बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। आरोप है कि लाखों रुपये खर्च कर अधिकृत एजेंसी से निस्तारण कराने के बावजूद संक्रमित चिकित्सा कचरा अस्पताल परिसर के समीप गधेरे में फेंका जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के दौरान यही गधेरा बेतलेश्वर होते हुए कोसी नदी में मिलता है, जिससे जल स्रोतों के दूषित होने की आशंका पैदा हो गई है।



मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन विभागों का नाम सामने आ रहा है, उनमें MICU, NICU और ब्लड बैंक जैसे अत्यंत संवेदनशील विभाग शामिल हैं। यहां से निकलने वाले जैव-चिकित्सा अपशिष्ट में संक्रमित पट्टियां, रक्तयुक्त सामग्री, सिरिंज, सुइयां, ब्लेड और अन्य संक्रामक कचरा शामिल हो सकता है, जिसका खुले में जाना नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
हैरानी की बात यह है कि अस्पताल में बायो-मेडिकल वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए हर महीने लाखों रुपये का भुगतान अधिकृत एजेंसी को किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि भुगतान नियमित हो रहा है तो कथित रूप से संक्रमित कचरा खुले गधेरे तक कैसे पहुंच रहा है? क्या एजेंसी समय पर कचरा उठा रही है? क्या अस्पताल प्रशासन निगरानी कर रहा है? या पूरी व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है?
जब इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. चंद्र प्रकाश भैंसोड़ा से बात की गई तो उन्होंने कहा, “यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, मैं इसकी जांच कराता हूं।”
बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2016 के अनुसार संक्रमित चिकित्सा कचरे का पृथक्करण, संग्रहण और अधिकृत कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी के माध्यम से वैज्ञानिक निस्तारण अनिवार्य है। खुले में फेंकना या सामान्य कचरे के साथ मिलाना नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
अब निगाहें जिला प्रशासन, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सरकारी धन के उपयोग से जुड़े गंभीर सवालों का भी होगा। जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसी की जवाबदेही तय करना और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई करना आवश्यक होगा।