जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखंड
अल्मोड़ा नंदा देवी मेले में झूला टूटने की घटना के बाद मेले की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अधिवक्ता विनोद चंद्र तिवारी ने दावा किया है कि उन्होंने हादसे से पहले ही मेले में सुरक्षा संबंधी कमियों को लेकर प्रशासन को लिखित रूप से अवगत कराया था।
तिवारी के अनुसार, सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में मेले के दुकानदारों और झूला संचालकों के सत्यापन के साथ ही झूलों की तकनीकी सुरक्षा जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए थे। इसी आधार पर उन्होंने 14 सितंबर 2026 को जिलाधिकारी, अल्मोड़ा को विधिक पत्र भेजकर मेले में संचालित होने वाले झूलों के आवश्यक प्रमाण-पत्रों का सत्यापन और उनकी तकनीकी सुरक्षा जांच कराने की मांग की थी।
उन्होंने बताया कि पत्र में खाद्य पदार्थों की जांच, विद्युत व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन व्यवस्थाओं का मेला शुरू होने से पहले निरीक्षण कराने की मांग भी की गई थी। तिवारी का कहना है कि इसके बावजूद मेले में झूला टूटने जैसी घटना होना सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने मांग की कि घटना की जिम्मेदारी तय करने के साथ यह भी स्पष्ट किया जाए कि मेला शुरू होने से पहले झूलों के सुरक्षा मानकों और आवश्यक प्रमाण-पत्रों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया था। साथ ही, 14 सितंबर को दी गई लिखित चेतावनी के बाद संबंधित अधिकारियों और मेला प्रशासन समिति की ओर से क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
तिवारी ने कहा कि नंदा देवी मेला केवल दुकानों, झूलों और मंचीय कार्यक्रमों तक सीमित आयोजन नहीं है, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्व है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने घटना के बाद केवल औपचारिक जांच किए जाने के बजाय मेले की सुरक्षा व्यवस्था, झूलों के प्रमाण-पत्रों, तकनीकी निरीक्षण और जिम्मेदारी से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जांच की मांग की।
तिवारी ने सवाल उठाते हुए कहा, “जनता को जवाब मिलना चाहिए कि मेला आम श्रद्धालुओं की सुरक्षित आस्था के लिए है या राजनीति और आर्थिक गतिविधियों के लिए?”