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जनतानामा न्यूज अल्मोडा उत्तराखण्ड

आंगनबाड़ी केंद्र माला सोमेश्वर

सोमेश्वर अल्मोडा माला अगले साल प्रस्तावित ऐतिहासिक नंदा राजजात यात्रा को लेकर तैयारियों की चर्चाएं तेज हैं, लेकिन यात्रा के प्रथम पड़ाव माला की जमीनी तस्वीर सरकारी दावों को आईना दिखा रही है। गांव के रास्ते बेहद खराब हालत में हैं, पंचायत घर बदहाल है और आंगनबाड़ी केंद्र तक अपने भवन में संचालित नहीं हो रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब स्थानीय लोगों के लिए बुनियादी सुविधाएं तक दुरुस्त नहीं हैं, तो नंदा राजजात के दौरान देश-प्रदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों के लिए सरकार किस तरह की व्यवस्था करेगी?
माला तक पहुंचने वाले रास्तों की हालत भी चिंता का विषय बनी हुई है। जगह-जगह खराब सड़क और रास्तों के कारण ग्रामीणों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे में नंदा राजजात के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने पर इन रास्तों पर यातायात और पैदल आवाजाही को लेकर गंभीर दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं।
दूसरी ओर गांव का पंचायत घर भी बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। जिस स्थान से ग्रामीण स्तर की प्रशासनिक गतिविधियां संचालित होनी चाहिएं, उसकी हालत ही सवालों के घेरे में है।
सबसे गंभीर स्थिति आंगनबाड़ी केंद्र की है। बच्चों के लिए निर्धारित आंगनबाड़ी केंद्र का अपना भवन तक जर्जर हालत में है और इसका संचालन किसी ग्रामीण के मकान में किया जा रहा है। सवाल यह है कि बच्चों के लिए बुनियादी सरकारी सुविधा उपलब्ध कराने में भी यदि व्यवस्था नाकाम है, तो विकास के बड़े-बड़े दावों का क्या मतलब रह जाता है?
नंदा राजजात की तैयारी सिर्फ बैठकों और घोषणाओं तक सीमित न रहे
नंदा राजजात उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी ऐतिहासिक यात्रा है। माला इसका महत्वपूर्ण प्रथम पड़ाव है। ऐसे में यहां सड़क, रास्ते, पेयजल, स्वच्छता, बिजली, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी और अन्य मूलभूत सुविधाओं को यात्रा से काफी पहले दुरुस्त किया जाना जरूरी है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब यात्रा अगले साल आनी है तो तैयारियां अभी से क्यों नहीं शुरू की जा रही हैं? क्या प्रशासन अंतिम समय में जागेगा? क्या श्रद्धालुओं के पहुंचने के बाद रास्तों की मरम्मत और सुविधाओं के लिए भागदौड़ शुरू होगी?
माला की बदहाल तस्वीर सरकार और प्रशासन के लिए चेतावनी है। नंदा राजजात के नाम पर केवल तैयारियों की घोषणाएं नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहिए। अब सवाल यही है—सरकार कब सुध लेगी और माला के रास्तों व बुनियादी सुविधाओं को कब दुरुस्त किया जाएगा?


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