Wed. Aug 12th, 2026
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जनतानामा न्यूज़ अल्मोड़ा उत्तराखण्ड

अल्मोड़ा सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा और मिशन पुराण फाउंडेशन, नई दिल्ली के बीच गंगा से संबंधित शोध एवं प्रलेखन को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य प्राचीन ग्रंथों में वर्णित गंगा की धाराओं एवं नदियों की पहचान, उनके दस्तावेजीकरण, साहित्य समीक्षा, डेटा संकलन और विश्लेषण के साथ-साथ भू-विज्ञान, जल-विज्ञान तथा वाटरशेड प्रबंधन से जुड़े अध्ययनों में समन्वय स्थापित करना है।
एमओयू के तहत प्राचीन ग्रंथों और श्लोकों में वर्णित गंगा से संबंधित भौगोलिक स्थानों की पहचान एवं पुष्टि विश्वविद्यालय द्वारा की जाएगी। साथ ही परियोजना से जुड़े राष्ट्रीय, सरकारी एवं अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों, प्राधिकरणों और संस्थानों के साथ समन्वय एवं संवाद स्थापित किया जाएगा।
विश्वविद्यालय और मिशन पुराण फाउंडेशन संयुक्त रूप से प्राचीन श्लोकों एवं ग्रंथों का अध्ययन करते हुए विभिन्न अभियानों की योजना बनाएंगे। हिमालयी एवं मैदानी क्षेत्रों में अभियान चलाकर फोटो, ऑडियो-विजुअल तथा अन्य शोध सामग्री का प्रलेखन किया जाएगा। शोध एवं अभियानों से प्राप्त आंकड़ों के स्रोत, स्थान और पहचान को दर्ज करते हुए विशेषज्ञों की सहायता से उनका आगे विश्लेषण किया जाएगा।
इसके साथ ही गंगा के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, पर्यावरणीय, आर्थिक एवं पारिस्थितिक महत्व से संबंधित शोध और प्रलेखन भी किया जाएगा। पुराणों में वर्णित गंगा नदी का निर्माण करने वाली प्राचीन धाराओं और नदियों की पहचान कर उनकी वर्तमान स्थिति का अध्ययन किया जाएगा तथा भविष्य के लिए व्यावहारिक कार्ययोजनाएं तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि इस एमओयू के माध्यम से गंगा और उसके किनारों पर बसे समुदायों के प्रति जागरूकता, शिक्षा एवं संरक्षण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्राचीन ग्रंथों में वर्णित गंगा की धाराओं और नदियों की पहचान एवं वर्तमान स्थिति के अध्ययन से भविष्य की कार्ययोजनाओं को बेहतर आधार मिल सकेगा।
मिशन पुराण फाउंडेशन के नितिन शर्मा ने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से प्राचीन संस्कृति और आध्यात्मिक महत्व वाले स्थलों की पहचान की जाएगी। गंगा के मार्ग में पड़ने वाले गांवों, स्थानों, कस्बों और शहरों के पौराणिक महत्व का अध्ययन कर उसे सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
एमओयू के माध्यम से गंगा के दुर्गम पर्वतीय भूभाग तथा चिन्हित धाराओं में गहन अध्ययन, प्राचीन विरासत और ग्रंथों में उपलब्ध सूचनाओं का विश्लेषण तथा नए चिन्हित क्षेत्रों में किए जाने वाले कार्यों की पूर्व योजना तैयार करने पर भी जोर दिया जाएगा। प्राचीन ग्रंथों से प्राप्त गंगा संबंधी ज्ञान, इसके सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व तथा भारत के इतिहास में इसकी भूमिका को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
समझौता ज्ञापन पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट तथा मिशन पुराण फाउंडेशन, दिल्ली की ओर से नितिन शर्मा ने हस्ताक्षर किए। एमओयू के गवाह के रूप में डॉ. ललित चन्द्र जोशी और श्री बिपिन चन्द्र जोशी ने हस्ताक्षर किए।


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